POSTED BY – Vanshika Mishra
ग्रेटर नोएडा, 25 अगस्त 2025 – गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के वास्तुकला और क्षेत्रीय योजना विभाग द्वारा “ऊर्जा कुशल आवास– अवधारणाएं और निर्माण तकनीक” विषय पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए ख्यातिप्राप्त वास्तुकारों, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और शिल्पकारों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह एवं डॉ. जी. वी. राव की उपस्थिति में हुआ। उद्घाटन सत्र में डॉ. कीर्ति पाल (डीन, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग) और सुश्री आकांक्षा निगम (एजीएम, YIEDA) भी शामिल रहीं। इस अवसर पर तनिषा सूरी ने शिव स्तुति पर भावपूर्ण कथक नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को भक्ति एवं संस्कृति से सराबोर कर दिया।
सम्मेलन के संयोजन में डॉ. माधुरी अग्रवाल और डॉ. अनंत प्रताप सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही विभागीय संकाय सदस्यों– डॉ. निरमीता मेहरोत्रा, आर्किटेक्ट आकाश पांचाल, आलोक वर्मा, राजेश एवं कार्तिका का भी सहयोग रहा।
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तीन दिनों तक चले विचार-विमर्श में डॉ. हरीश त्रिपाठी, डॉ. के.के. धोटे, प्रो. रितु गुलाटी, डॉ. फरहीन बानो, आर्किटेक्ट यतिन पांड्या, डॉ. मो. साकिब, डॉ. एकता सिंह, प्रो. रुचि, आयुष मेहता, डॉ. विलोशीन गोविंदर (दक्षिण अफ्रीका) एवं डॉ. जन्मेजय गुप्ता जैसे प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
इन सत्रों में आवास रणनीतियां, ऊर्जा दक्षता, नेट-जीरो भवन, कार्बन-निगेटिव सामग्री, स्थानीय निर्माण सामग्रियों के प्रयोग, ग्राम विकास दृष्टिकोण और बहुआयामी डिजाइन पद्धतियों पर चर्चा हुई।
सम्मेलन का मुख्य आकर्षण रहा वरिष्ठ वास्तुकार यतिन पांड्या का विशेष सत्र, जिसमें उन्होंने अपने 7×6 डिजाइन मैट्रिक्स के माध्यम से छात्रों को विश्लेषणात्मक व रचनात्मक डिजाइन की नई दिशा दिखाई।
इसके अतिरिक्त, अडानी सीमेंट, मोटो टाइल्स, गैलेंट ऑर्बिट और एसीई जैसी कंपनियों की भागीदारी से उद्योग-अकादमिक सहयोग को बल मिला। वहीं, बनारसी बुनकरों और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कलाकार श्रीमती अंबिका देवी जैसे शिल्पकारों की उपस्थिति ने सम्मेलन को सांस्कृतिक गहराई प्रदान की।
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आयोजकों ने कहा कि इस सम्मेलन ने अंतःविषय दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया, जिसमें प्रौद्योगिकी, परंपरा और रचनात्मकता को एक साथ लाकर ऊर्जा-कुशल और किफायती आवास समाधान तलाशे गए।
तीन दिवसीय सम्मेलन का समापन इस आशा के साथ हुआ कि ऐसे सहयोगात्मक प्रयास आवास क्षेत्र में नई रणनीतियों को जन्म देंगे और सतत विकास की दिशा में ठोस योगदान देंगे।




