Postd by : Yash Goswami
जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए 6 पैरा स्पेशल फोर्स के हवलदार जिंटू अली शेख को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में पूरे सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम विदाई में उनके भाई, सूबेदार रफीकुल शेख का भाषण सबको भावुक कर गया। रफीकुल ने कहा, “मैं अपने भाई के बेटे और बेटी को सेना में भेजने का प्रयास करूंगा। मेरे लिए पहले देश है और फिर परिवार। मेरा कर्तव्य पहले देश के प्रति है। मैं देश सेवा को ही पहली प्राथमिकता दूंगा।” कब्रिस्तान में उन्होंने जोर देकर कहा, “हम सैनिक हैं, सैनिकों का कोई धर्म नहीं होता और न जाति होती है। भारतीय सेना का कोई धर्म नहीं है। हम एक ही कटोरी में खाते-पीते हैं। सेना में कोई भेदभाव नहीं है। किसी में अगर दम है तो बोल दे कि भारतीय सेना हिंदू या मुस्लिम है। भारतीय सेना एक ऐसी जगह है जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध एक ही थाली में खाते हैं और सभी को एक ही बर्तन में खाना बांटा जाता है। अगर किसी को भाईचारा देखना है तो फौज में जाकर देखो। तब पता चलेगा भाईचारा क्या होता है।” रफीकुल ने युवाओं से सेना में शामिल होने और देश सेवा को प्राथमिकता देने की अपील भी की।


