Posted By Boby Bhati
BREAKING NEWS : गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा एवं साहित्य विभाग, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय द्वारा बुद्धवार, 29 अप्रैल 2026 को कॉन्फ्रेंस रूम में ‘विशेषज्ञ व्याख्यान एवं काव्य-पाठ’ कार्यक्रम का सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात कवि एवं साहित्यकार प्रो. जितेन्द्र श्रीवास्तव (प्रोफ़ेसर एवं कुलसचिव, इग्नू, नई दिल्ली) तथा विशेष वक्ता भारतीय भाषा एवं साहित्य विभाग के विभागाध्यक्ष एवं मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. माधव गोविन्द रहें ।
प्रो. जितेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि
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कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कवि एवं साहित्यकार प्रो. जितेन्द्र श्रीवास्तव ने अपने व्याख्यान में समकालीन कविता को अंतिम जन की कविता बताते हुए कहा कि यह समाज के अंतिम व्यक्ति की संवेदनाओं, संघर्षों और सपनों की प्रतिनिधि है। उनके अनुसार समकालीन कविता में प्रेम, क्रांति का विरोध नहीं, बल्कि उसका सहचर है। उन्होंने इस तथ्य पर भी विशेष बल दिया कि पूर्व समय में मंच की कविता और प्रकाशित कविता के बीच कोई विशेष विभाजन नहीं था । किंतु वर्तमान समय में यह अंतर स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है। समकालीन कविता को उन्होंने सपनों की कविता की संज्ञा देते हुए कहा कि यह व्यापक समाज तक पहुँचने वाली रचनात्मक शक्ति है। साथ ही उन्होंने समकालीन रचनाकारों के लिए प्रयोगशीलता के साथ संप्रेषणीयता को भी अनिवार्य माना।
व्याख्यान के उपरांत प्रो. श्रीवास्तव ने अपनी चर्चित कविताओं का काव्य-पाठ किया, जिनमें ‘मानुष राग’, ‘साथ’, ‘चुटकी भर’ तथा विशेष रूप से ‘सोन चिरैया’ ने उपस्थित श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया। ‘सोन चिरैया’ पूर्वी उत्तर प्रदेश में गाए जाने वाले लोकगीत ‘सोहर’ पर आधारित कविता है, जिसमें लोकधर्मी संवेदना और समकालीन चेतना का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
प्रो. माधव गोविंद ने समकालीन कविता को वर्तमान समय की सशक्त आवाज बताया और कहा कि समकालीन कविता समाज की बदलती चेतना, संघर्ष और संवेदनाओं को प्रभावी अभिव्यक्ति प्रदान करती है।
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कार्यक्रम का संचालन शोध छात्रा अनुराधा ने किया ।
कार्यक्रम में विभाग के अनेक प्राध्यापकों की सक्रिय उपस्थिति रही, जिनमें डॉ. दिवाकर गरवा, डॉ. रेनू यादव, डॉ. मोहम्मद आसिफ, डॉ. विभावरी, डॉ. ओबैदुल गफ्फार, डॉ. ममता कुमारी तथा डॉ. अपर्णा वर्मा सहित अन्य शिक्षकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम संकाय डॉ. विनीत, डॉ. मंजरी, डॉ. शिवानी राय, डॉ. सौम्या सिसोदिया सहित अन्य प्राध्यापकगण तथा विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्ण सहभागिता निभाई।
विद्यार्थियों ने पूछे महत्वपूर्ण प्रश्न
विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए विचारोत्तेजक प्रश्नों ने कार्यक्रम को और अधिक संवादपूर्ण एवं जीवंत बना दिया। ज्ञानवर्धक संवाद, गंभीर साहित्यिक विमर्श और प्रभावपूर्ण काव्य-पाठ से समृद्ध यह आयोजन अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।




