16 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्देश जारी करते हुए कहा कि अगर किसी भी न्यायिक मामले में 2 लाख रुपये से अधिक की नकद लेन-देन की जाती है, तो इसकी जानकारी आयकर अधिकारियों को अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए। यह आदेश न्यायपालिका में पारदर्शिता और टैक्स चोरी को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे लेन-देन से संबंधित सभी पक्षों को आयकर विभाग को सूचित करना होगा, ताकि संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और कर कानूनों का पालन सुनिश्चित हो। यह निर्देश न्यायालय में चल रहे एक केस की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें नकद लेन-देन को लेकर सवाल उठे थे। कोर्ट का यह कदम न्यायिक प्रक्रियाओं में वित्तीय अनुशासन लाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लिया गया है।
Posted By : Diya singh



