Posted by :krish Poswal
श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने कहा है कि नशामुक्त, संस्कारित और आत्मानुशासित युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि नशे से मुक्त जीवन केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का भी प्रतीक है। युवा यदि अपने जीवन में संयम, सदाचार और सकारात्मक सोच को अपनाएँ, तो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य शीघ्र साकार हो सकता है।वे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार विश्वविद्यालय में आयोजित “नशा मुक्त भारत अभियान–विकसित भारत की पहचान” के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे।प्रो. पाठक ने कहा कि वर्तमान समय में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति केवल स्वास्थ्य का प्रश्न नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय चिंता का विषय है। नशा व्यक्ति की प्रतिभा, परिवार की खुशियों और समाज की ऊर्जा को क्षीण करता है। इसलिए शिक्षण संस्थानों की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं रह सकती; उन्हें चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और सामाजिक चेतना के संवर्धन का भी दायित्व निभाना होगा।उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान-परंपरा आत्मसंयम, विवेक और संतुलित जीवन का संदेश देती है। यदि युवा इन आदर्शों को व्यवहार में उतारें, तो वे न केवल स्वयं को व्यसनों से सुरक्षित रखेंगे, बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से नशामुक्ति को जन-आंदोलन बनाने तथा अपने परिवार, मित्रों और समाज को भी इस दिशा में जागरूक करने का आह्वान किया।कार्यक्रम में प्रतिष्ठित मनोचिकित्सक एवं सेरेनिटी क्लिनिक की विशेषज्ञ डॉ. अंजली नागपाल ने मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव, मानसिक स्वास्थ्य तथा व्यसन मुक्ति के वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि त्वरित सफलता की मानसिकता, डिजिटल व्यसन और कुसंगति युवाओं को नशे की ओर ले जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से मानसिक संतुलन बनाए रखने, नियमित योग एवं व्यायाम करने तथा सकारात्मक एवं रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहने का आग्रह किया।कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. मार्कण्डेय नाथ तिवारी तथा संयोजक डॉ. नवदीप जोशी ने कहा कि नशामुक्त भारत अभियान का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि युवाओं में स्वस्थ जीवन-मूल्यों, आत्मविश्वास और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करना है।इस अवसर पर योग एवं समग्र स्वास्थ्य पीठ के प्रमुख प्रो. विष्णुपद, दर्शन पीठ के प्रमुख प्रो. अनेकांत, छात्र कल्याण पीठ की प्रमुख प्रो. सुजाता त्रिपाठी, डॉ. रमेश कुमार, डॉ. हरि राम मीना सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का समापन डॉ. हर्ष कुमार शुक्ला द्वारा शांति पाठ के साथ हुआ।विश्वविद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक के नेतृत्व में शिक्षा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व को एक सूत्र में जोड़ने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इस आयोजन ने विद्यार्थियों के बीच नशामुक्त जीवन के प्रति जागरूकता के साथ-साथ विकसित भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका का भी प्रभावी संदेश दिया।



